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Saturday, December 31, 2011

वसंत और खूबसूरत

खूबसूरत  :-  दिल बोल रही हे I दिल धड़क रही हे I दिल चमक रही हे I
एक कलि की अन्धर सोरही थी मैं
तूने चुवा वो कलि खिल्गायी  मैं उडी
 क्या हुवा मुझे पता नहीं I क्या ये होती हे प्यार ?

वसंत :-  मोसम बदल गया मैं आया
मैं हर कलियों को खिलाती हूं I
हर कलियोमें तू थी तू ही उसकी खूबसूरती
तू ही उसकी कुश्बू तू नहीं तो फूल केवल एक कागज़ हे II

खूबसूरत :- मुझे लेचलो  तुमरे साथ हर पल रहू मैं तुमरे सात
न चोड़के जाना मुचे मैं अकेली हूं तेरे बिन मैं नहीं II

वसंत :- न कहूँगा मैं अलविदा मुचे जाना हे
आओगा मैं अगली बार इन्तासार करना मुचे I
वापस न जावो कली में 
जावो लड़कीओं की पास I
वों करेगे स्वागत न देंगे तुमे सोने
आओगा मैं अगली बार न जावूँगा मैं तेरे पास से II

C. Hariharn